अयोध्या में निर्माण मज़दूरी
अयोध्या उत्तर प्रदेश में है, इसलिए यहाँ के निर्माण मज़दूर का लेबर कार्ड, कल्याण बोर्ड और न्यूनतम मज़दूरी उत्तर प्रदेश के नियमों से तय होती है — किसी राष्ट्रीय पेज से नहीं। इस पेज पर वही बातें हैं जो अयोध्या पर लागू होती हैं।
अयोध्या का श्रम कार्यालय
उप श्रम आयुक्त कार्यालय, अयोध्या (फ़ैज़ाबाद)
Shivkuti, Khapradih Kothi, Civil Lines, Faizabad (Ayodhya)अयोध्या (फ़ैज़ाबाद) श्रम क्षेत्र।
स्रोत: Labour Commissioner Organisation, Uttar Pradesh — regional offices
क्षेत्राधिकार: अयोध्या पर उत्तर प्रदेश का श्रम कानून लागू होता है। पास के शहर, चाहे वे एक ही मज़दूर बाज़ार का हिस्सा हों, दूसरे राज्य के बोर्ड में आ सकते हैं।
नियम कहाँ से हैं
उत्तर प्रदेश में लेबर कार्ड
लखनऊ, कानपुर, नोएडा, ग़ाज़ियाबाद या वाराणसी की साइट पर काम कर रहे हैं? तो यूपी में आपका लेबर कार्ड सिर्फ़ ₹20 में बन जाता है। बनाता उसे उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड है। पर एक बात सबसे पहले, क्योंकि इससे रोज़ हज़ारों लोगों का वक़्त बरबाद हो रहा है: upbocw.in वाला पुराना पता अब नहीं चलता — वह 404 दिखाता है। चालू पोर्टल labour.upbocw.in है।
सही पता कौन सा है
चालू पोर्टल: labour.upbocw.in। वहाँ "उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड" लिखा दिखेगा।
नया पंजीकरण labour.upbocw.in/register/worker पर होता है और रिन्यू labour.upbocw.in/worker/renew पर।
पुराना पता upbocw.in अब 404 दिखाता है। दुख की बात यह है कि श्रम विभाग की अपनी वेबसाइट uplabour.gov.in पर आज भी वही पुराना लिंक लगा है, और नए पोर्टल पर बना "वेबसाइट" बटन भी उसी पर ले जाता है। यानी सरकारी इशारों पर चलने वाला आदमी भी 404 पर पहुँचता है।
इसलिए सीधे labour.upbocw.in टाइप कीजिए।
बोर्ड की हेल्पलाइन 1800-180-5412 है और ईमेल upbocboardlko@gmail.com। श्रम विभाग की अपनी अलग हेल्पलाइन 1800-180-5160 है, और लैंडलाइन 0512-2295176 तथा 0512-2297142।
पंजीकरण कैसे होता है
पूरी प्रक्रिया आधार से होती है — पहले आधार नंबर, फिर आधार पर आने वाला OTP, फिर मोबाइल पर आने वाला OTP, फिर बाकी जानकारी, और आख़िर में भुगतान।
यानी आधार से जुड़ा चालू मोबाइल नंबर आपके पास होना ज़रूरी है। यह न हो तो पहले नज़दीकी आधार केंद्र जाकर मोबाइल नंबर जुड़वाइए, वरना पंजीकरण शुरू ही नहीं होगा।
पात्रता पोर्टल पर साफ़ लिखी है: "आवेदक की आयु 18 से 60 वर्ष के मध्य होनी चाहिए" और "आवेदक द्वारा निर्माण श्रमिक के रूप में वर्ष में कम से कम 90 दिन कार्य किया होना चाहिए।"
कागज़ों की सरकारी सूची पोर्टल के खुले पन्नों पर नहीं छपी — वहाँ सिर्फ़ ये दो शर्तें लिखी हैं। इसलिए हम कागज़ों की कोई सूची यहाँ नहीं गिना रहे। साथ में आधार, बैंक पासबुक, फ़ोटो और काम का प्रमाणपत्र ले जाइए, और बाकी 1800-180-5412 पर पूछ लीजिए।
एक और छोटी बात जो अटकाती है: पोर्टल के मुखपृष्ठ पर "नया श्रमिक पंजीयन" वाला बटन दबाने पर कुछ नहीं होता। पता सीधे टाइप करना पड़ता है।
फ़ीस, अंशदान और रिन्यू — यूपी का हिसाब साफ़ है
पंजीकरण शुल्क ₹20। यह एक बार लगता है।
अंशदान: एक साल के ₹20, दो साल के ₹40, और तीन साल के ₹60।
यानी तीन साल का पूरा कार्ड कुल ₹80 में बन जाता है। इससे सस्ता कोई भी सरकारी कागज़ नहीं है।
रिन्यू देर से कराने पर विलंब शुल्क लगता है और यूपी में उसका हिसाब साफ़ छपा है — 1 से 30 दिन देर पर ₹5, 31 से 90 दिन पर ₹10, 91 से 180 दिन पर ₹20, और 180 दिन से ज़्यादा देर पर ₹50।
ध्यान दीजिए कि ये विलंब शुल्क बहुत छोटे हैं। यानी देर हो भी जाए तो कार्ड बचाया जा सकता है। सबसे बुरा यही है कि लोग डर के मारे रिन्यू कराना ही छोड़ देते हैं।
बोर्ड के पोर्टल पर दुर्घटना से मौत और अपंगता के लिए ₹2,00,000 का बीमा कवर भी लिखा है।
यूपी बोर्ड की योजनाएँ और रकम
ये रकमें बोर्ड के अपने योजना पन्ने से ली गई हैं, अगस्त 2026 में।
मृत्यु लाभ: ₹2,00,000 से ₹5,00,000 तक।
वृद्धावस्था पेंशन: ₹3,000 प्रति माह, 60 साल की उम्र और पाँच साल की सदस्यता पर। विकलांगता पेंशन ₹2,000 प्रति माह।
चिकित्सा उपचार सहायता ₹1,00,000 तक। विकलांगता सहायता ₹50,000 तक।
मातृत्व लाभ ₹20,000।
विवाह सहायता ₹55,000 — तीन साल की सदस्यता पर, दो बेटियों तक।
आवास सहायता ₹2,00,000 तक, तीन साल की सदस्यता पर। घर की मरम्मत के लिए ₹50,000 तक, दो साल की सदस्यता पर।
बच्चों की छात्रवृत्ति ₹10,000 से ₹50,000 प्रति वर्ष तक। कौशल प्रशिक्षण के लिए ₹20,000 तक।
एक बात ईमानदारी से: बोर्ड के पोर्टल पर ही योजनाओं की गिनती और बाँटी गई रकम के आँकड़े दो जगह दो तरह लिखे हैं। इसका मतलब यह नहीं कि योजनाएँ झूठी हैं — इसका मतलब यह है कि दावा करने से पहले 1800-180-5412 पर आज की रकम पूछ लेना समझदारी है।
उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मज़दूरी
नोएडा और ग़ाज़ियाबाद में मज़दूर को कम से कम ₹13,690 महीना मिलना चाहिए — 26 दिन के हिसाब से करीब ₹527 रोज़ — अगर आप बेलदार यानी अकुशल हैं। यह दर 1 अप्रैल 2026 से बढ़ी है, और अपने आप नहीं बढ़ी — नोएडा और ग्रेटर नोएडा के मज़दूरों की हड़ताल के बाद बढ़ी। सरकार ने 17 अप्रैल 2026 को आदेश निकालकर पूरे प्रदेश को तीन श्रेणियों में बाँटा, जिसमें गौतम बुद्ध नगर और ग़ाज़ियाबाद की दर सबसे ऊँची है। पर एक चेतावनी: श्रम विभाग की वेबसाइट पर जो पन्ना "न्यूनतम मज़दूरी" के नाम से बना है, उस पर आज भी 2024 का कागज़ "Latest" लिखकर लगा हुआ है।
आज कौन सा आदेश लागू है
आदेश संख्या 374/36-2-2026-2041256, लखनऊ, तारीख़ 17 अप्रैल 2026, प्रमुख सचिव डॉ. एम.के. षणमुग सुंदरम के दस्तख़त से। लागू 1 अप्रैल 2026 से।
यह आदेश कैसे आया, यह जानने लायक है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मज़दूरों की हड़ताल हुई और उनकी मुख्य माँग यह थी कि यूपी की न्यूनतम मज़दूरी हरियाणा के बराबर की जाए। सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति बनाई, समिति 13 अप्रैल 2026 को गौतम बुद्ध नगर गई, दोनों पक्षों से बात की, और उसके बाद यह आदेश निकला।
यानी यह दर मज़दूरों के दबाव से बनी है। यह याद रखने लायक बात है।
यह आदेश उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 3(ब) के तहत, अंतरिम राहत (interim relief) के रूप में निकला है, और यह श्रम आयुक्त के 25 मार्च 2026 के आदेश की जगह लेता है।
ईंट-भट्ठे इससे बाहर हैं, क्योंकि वहाँ मज़दूरी टुकड़े के हिसाब से तय होती है।
तीन श्रेणियाँ — आपका ज़िला किसमें है
श्रेणी-1: गौतम बुद्ध नगर और ग़ाज़ियाबाद ज़िले। यानी नोएडा, ग्रेटर नोएडा और ग़ाज़ियाबाद। सबसे ऊँची दर यहीं है।
श्रेणी-2: वे सभी ज़िले जहाँ नगर निगम है (गौतम बुद्ध नगर और ग़ाज़ियाबाद को छोड़कर)। यानी लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज, बरेली, गोरखपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़, झाँसी, सहारनपुर, फ़िरोज़ाबाद, मथुरा, शाहजहाँपुर और अयोध्या जैसे नगर निगम वाले ज़िले।
श्रेणी-3: बाकी सारे ज़िले।
यह बँटवारा 2026 में पहली बार हुआ है। पहले पूरे यूपी की एक ही दर थी। इसलिए अगर किसी को याद हो कि "यूपी में एक ही रेट होता है", तो वह बात अब पुरानी है।
यूपी की दरें — 1 अप्रैल 2026 से
दर के दो हिस्से हैं — मूल मज़दूरी, और उसके ऊपर परिवर्तनीय महँगाई भत्ता। आपका हक़ दोनों जोड़कर बनने वाली पूरी रकम पर है।
श्रेणी-1 (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, ग़ाज़ियाबाद): अकुशल मूल ₹12,885 + भत्ता ₹805 = ₹13,690। अर्धकुशल ₹14,173 + ₹886 = ₹15,059। कुशल ₹15,876 + ₹992 = ₹16,868।
श्रेणी-2 (नगर निगम वाले ज़िले): अकुशल ₹12,241 + ₹765 = ₹13,006। अर्धकुशल ₹13,464 + ₹842 = ₹14,306। कुशल ₹15,082 + ₹943 = ₹16,025।
श्रेणी-3 (बाकी ज़िले): अकुशल ₹11,629 + ₹727 = ₹12,356। अर्धकुशल ₹12,791 + ₹799 = ₹13,590। कुशल ₹14,328 + ₹896 = ₹15,224।
यूपी के इस आदेश में अतिकुशल का कोई दर्जा नहीं है। तीन ही दर्जे हैं।
एक बात हम साफ़ कह देना चाहते हैं: आदेश की टेबल में सिर्फ़ "Basic Wage (₹)" लिखा है — यह नहीं लिखा कि यह महीने की दर है या दिन की। रकम के आकार से, और इससे कि पूरी माँग ही हरियाणा की मासिक दरों के बराबर होने की थी, यह साफ़ तौर पर महीने की दर है। पर चूँकि कागज़ पर यह शब्द नहीं छपा, हम इसे "हमारा पढ़ना" कहकर बता रहे हैं, सरकारी बात कहकर नहीं।
उसी हिसाब से दिहाड़ी निकालें (महीने की दर ÷ 26) तो श्रेणी-1 में अकुशल की दिहाड़ी करीब ₹527, अर्धकुशल करीब ₹579 और कुशल करीब ₹649 बैठती है। यह गणित हमारा है, आदेश में दिहाड़ी छपी नहीं है।
सावधान: "Latest" लिखा हुआ 2024 का कागज़
यह यूपी का सबसे बड़ा जाल है, और यह ठीक उसी पन्ने पर है जहाँ हर आदमी सबसे पहले जाएगा।
श्रम विभाग की वेबसाइट पर न्यूनतम मज़दूरी का अपना पन्ना है। उस पर सबसे नई प्रविष्टि का नाम है "Minimum Wages and V.D.A. in 74 Employment Latest" — नाम में "Latest" लिखा है।
वह कागज़ 1 अक्टूबर 2024 का है, और उसी कागज़ पर अपनी मियाद भी छपी है: "दिनांक 1-10-2024 से 31-3-2025 तक"। यानी वह मार्च 2025 में ही ख़त्म हो चुका था, और आज भी "Latest" लिखकर लगा हुआ है — करीब सत्रह महीने पुराना।
उसमें अकुशल की दिहाड़ी ₹412 लिखी है। नई दर के हिसाब से श्रेणी-1 में यह करीब ₹527 बनती है। यानी फ़र्क रोज़ के सौ रुपये से ज़्यादा का है।
नया आदेश उस पन्ने पर है ही नहीं। वह uplabour.gov.in के मुखपृष्ठ पर चलने वाली सूचना पट्टी (ticker) में लगा है।
इसलिए यूपी में यह याद रखिए: न्यूनतम मज़दूरी वाला पन्ना नहीं, मुखपृष्ठ देखिए। और हर कागज़ पर उसकी अपनी मियाद पढ़िए — यूपी के कागज़ों पर "किस तारीख़ से किस तारीख़ तक" साफ़ छपा होता है।
अगली बदलाव की तारीख़ 1 अक्टूबर 2026 है।
आम सवाल
- अयोध्या में लेबर कार्ड कैसे बनवाएँ?
- अयोध्या उत्तर प्रदेश में आता है, इसलिए निर्माण मज़दूर Uttar Pradesh Building and Other Construction Workers Welfare Board में BOCW अधिनियम के तहत रजिस्ट्रेशन कराते हैं। शर्तें और फ़ॉर्म बोर्ड की आधिकारिक साइट पर हैं।
- अयोध्या में निर्माण मज़दूर की न्यूनतम मज़दूरी क्या है?
- न्यूनतम मज़दूरी उत्तर प्रदेश सरकार तय करती है और यह काम के दर्जे और क्षेत्र के हिसाब से बदलती है। मौजूदा दरें UP Labour Department — Minimum Wages and related VDA में देखें।
- अयोध्या में श्रम कार्यालय (लेबर ऑफ़िस) कहाँ है?
- उप श्रम आयुक्त कार्यालय, अयोध्या (फ़ैज़ाबाद) — Shivkuti, Khapradih Kothi, Civil Lines, Faizabad (Ayodhya)। फ़ोन: 9415361026। क्षेत्र: अयोध्या (फ़ैज़ाबाद) श्रम क्षेत्र।
- यूपी में लेबर कार्ड की वेबसाइट कौन सी है?
- labour.upbocw.in। पुराना पता upbocw.in अब 404 दिखाता है, हालाँकि श्रम विभाग की वेबसाइट पर आज भी वही लिंक लगा है। सीधे labour.upbocw.in टाइप कीजिए।
- यूपी में लेबर कार्ड कितने का बनता है?
- पंजीकरण शुल्क ₹20, और अंशदान एक साल का ₹20, दो साल का ₹40 या तीन साल का ₹60। यानी तीन साल का पूरा कार्ड कुल ₹80 में बनता है।
- यूपी में रिन्यू कराना भूल गया — अब क्या होगा?
- यूपी में विलंब शुल्क छोटे हैं — 1 से 30 दिन देर पर ₹5, 31 से 90 दिन पर ₹10, 91 से 180 दिन पर ₹20, और 180 दिन से ज़्यादा पर ₹50। देर हो जाए तब भी रिन्यू करा लीजिए, कार्ड बच जाता है।
- यूपी में कार्ड बनवाने के लिए क्या-क्या कागज़ चाहिए?
- आधार नंबर और आधार से जुड़ा चालू मोबाइल नंबर सबसे ज़रूरी है, क्योंकि पूरी प्रक्रिया दो OTP से होती है। उम्र 18 से 60 के बीच और साल में कम से कम 90 दिन निर्माण का काम — ये दो शर्तें पोर्टल पर लिखी हैं। कागज़ों की पूरी सरकारी सूची पोर्टल पर नहीं छपी, इसलिए 1800-180-5412 पर पूछ लीजिए।
- नोएडा में मज़दूर को महीने का कितना मिलना चाहिए?
- नोएडा और ग्रेटर नोएडा श्रेणी-1 में आते हैं। वहाँ 1 अप्रैल 2026 से अकुशल ₹13,690, अर्धकुशल ₹15,059 और कुशल ₹16,868 — मूल मज़दूरी और महँगाई भत्ता जोड़कर। 26 दिन के हिसाब से अकुशल की दिहाड़ी करीब ₹527 बैठती है।
- लखनऊ या कानपुर का रेट अलग है क्या?
- हाँ। नगर निगम वाले ज़िले श्रेणी-2 में आते हैं, जहाँ अकुशल ₹13,006, अर्धकुशल ₹14,306 और कुशल ₹16,025 है। सिर्फ़ गौतम बुद्ध नगर और ग़ाज़ियाबाद श्रेणी-1 में हैं।
- ठेकेदार वेबसाइट का "Latest" वाला कागज़ दिखा रहा है जिसमें ₹412 लिखा है?
- वह 1 अक्टूबर 2024 का कागज़ है और उसकी मियाद 31 मार्च 2025 को ही ख़त्म हो चुकी है — फिर भी वेबसाइट पर "Latest" लिखा हुआ है। नई दर 17 अप्रैल 2026 के आदेश में है, जो मुखपृष्ठ की सूचना पट्टी पर लगा है।
- यूपी में मज़दूरी बढ़ी कैसे?
- नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मज़दूरों की हड़ताल के बाद। उनकी मुख्य माँग यही थी कि यूपी की मज़दूरी हरियाणा के बराबर की जाए। सरकार ने समिति बनाई, दोनों पक्षों से बात की, और 17 अप्रैल 2026 को यह आदेश निकला।
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