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सोलन में निर्माण मज़दूरी

सोलन हिमाचल प्रदेश में है, इसलिए यहाँ के निर्माण मज़दूर का लेबर कार्ड, कल्याण बोर्ड और न्यूनतम मज़दूरी हिमाचल प्रदेश के नियमों से तय होती है — किसी राष्ट्रीय पेज से नहीं। इस पेज पर वही बातें हैं जो सोलन पर लागू होती हैं।

क्षेत्राधिकार: सोलन पर हिमाचल प्रदेश का श्रम कानून लागू होता है। पास के शहर, चाहे वे एक ही मज़दूर बाज़ार का हिस्सा हों, दूसरे राज्य के बोर्ड में आ सकते हैं।

नियम कहाँ से हैं

हिमाचल प्रदेश में लेबर कार्ड

शिमला, बद्दी, सोलन, मंडी या कांगड़ा की साइट पर काम कर रहे हैं? तो हिमाचल में लेबर कार्ड बनवाने का ख़र्च देश में शायद सबसे कम है — पंजीकरण शुल्क एक रुपया, और उसके ऊपर नौ रुपये का अंशदान जो तीन साल चलता है। बिहार, यूपी, झारखंड या नेपाल की तरफ़ से आकर बद्दी-बरोटीवाला की साइटों पर काम कर रहे हैं तो भी कार्ड बनता है; कार्ड इस पर बनता है कि आप काम कहाँ कर रहे हैं। बनाता उसे हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड है, जिसका दफ़्तर हमीरपुर में है।

अर्ज़ी कहाँ दें

बोर्ड का अपना पोर्टल bocw.hp.gov.in है। नया पंजीकरण, जानकारी बदलना, नवीनीकरण, परिवार के सदस्य जोड़ना, कागज़ अपलोड करना, फ़ीस जमा करना और योजना के लिए अर्ज़ी — सब वहीं से होता है।

पर पंजीकरण का असली काम दफ़्तर में होता है। बोर्ड के अपने पन्ने पर लिखा है कि कामगार को अपने सम्बन्धित श्रम कल्याण अधिकारी के कार्यालय में दो पासपोर्ट फ़ोटो के साथ जाना होगा। यानी पोर्टल पर भरने के बाद भी दफ़्तर जाना पड़ेगा — यह पहले से जान लीजिए तो एक चक्कर बचेगा।

बोर्ड का मुख्यालय: पुराना एसडीएम कार्यालय, हमीरपुर 177001। फ़ोन 01972-222411। ईमेल hpbocwwboard@gmail.com।

ईमानदारी से एक बात: हिमाचल बोर्ड का कोई टोल-फ़्री नंबर उसके सरकारी पन्नों पर हमें नहीं मिला। बोर्ड का "Worker Helpline" वाला पन्ना भी यही हमीरपुर वाला नंबर और यही ईमेल देता है। इसलिए वही सेव कीजिए।

और यह चेतावनी ज़रूरी है: बोर्ड के अपने सम्पर्क वाले पन्ने पर वेबसाइट का पता "hpbocwb.nic.in" लिखा है। वह पता आज खुलता ही नहीं। चालू पता bocw.hp.gov.in है। सरकारी पन्ने पर लिखा होने भर से कोई पता चालू नहीं हो जाता।

फ़ीस — एक रुपया, और तीन साल के नौ रुपये

बोर्ड के अपने पन्ने पर साफ़ लिखा है: पंजीकरण शुल्क मात्र ₹1, और वह एक ही बार देय है।

उसके बाद सदस्य बने रहने और योजनाओं का लाभ लेने के लिए ₹9 की दर से अग्रिम अंशदान जमा करना होता है, जो पंजीकरण की तारीख़ से तीन साल के लिए मान्य रहता है।

अगले तीन साल के लिए नवीनीकरण शुल्क ₹15 है।

यानी पहले तीन साल का पूरा सरकारी ख़र्च दस रुपये है। यह रकम इतनी छोटी है कि यक़ीन नहीं होता — इसीलिए यहाँ एजेंट सबसे ज़्यादा कमाते हैं। कोई सैकड़ों रुपये माँगे तो वह सरकारी फ़ीस नहीं है। रसीद ज़रूर लीजिए।

अंशदान बोर्ड के बैंक खाते में सीधे जमा किया जा सकता है — बोर्ड ने अपने पन्ने पर तीन बैंक और उनके खाता नंबर छापे हैं: UCO बैंक निगम विहार शाखा, यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया द मॉल शिमला, और पंजाब नेशनल बैंक द मॉल शिमला।

पर एक बात ध्यान से: बोर्ड लिखता है कि अगर आप सीधे बैंक से जमा करें तो उसकी सूचना अपने श्रम कल्याण अधिकारी को देना ज़रूरी है, वरना वह रकम आपके खाते में चढ़ेगी ही नहीं। यानी पैसा जमा कर देना काफ़ी नहीं है — पर्ची दफ़्तर में दिखाना भी उतना ही ज़रूरी है।

कौन-कौन से कागज़ लगेंगे

दो पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो।

उम्र का प्रमाण — इनमें से किसी एक की सत्यापित प्रति: स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार का जन्म प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता कार्ड, आधार कार्ड, या परिवार रजिस्टर की प्रति।

काम का सबूत — नियोजक या ठेकेदार से मज़दूरी पर्ची या नियुक्ति पत्र, जिसमें साफ़ लिखा हो कि आप निर्माण कामगार हैं और कार्यस्थल तथा काम का पूरा ब्यौरा दिया हो।

और यह सबसे काम की बात है, जो बोर्ड ने ख़ुद अपने पन्ने पर लिखी है: अगर ऐसा प्रमाणपत्र मिल ही न पाए, तो शहरी स्थानीय निकाय के कार्यकारी अधिकारी का, या नगर निगम क्षेत्र में सम्बन्धित पार्षद या वार्ड सभा के सदस्य का, या ग्राम पंचायत के पंचायत सचिव का जारी किया प्रमाणपत्र भी माना जा सकता है। यानी ठेकेदार दस्तख़त न करे तो तीन और दरवाज़े खुले हैं।

पात्रता: उम्र 18 से 60 साल के बीच, और पिछले 12 महीनों में कम से कम 90 दिन का निर्माण काम।

हिमाचल की एक बात ख़ास तौर पर काम की है: बोर्ड लिखता है कि उन 90 दिनों में निजी निर्माण कार्य के साथ-साथ सरकार या पंचायत के चलाए गए निर्माण कार्यों की अवधि भी गिनी जाएगी। यानी मनरेगा जैसे पंचायत के काम भी गिनती में आते हैं।

हर साल मज़दूरी पर्ची जमा करनी है — यह मत भूलिए

यह हिमाचल का सबसे ज़रूरी नियम है और सबसे ज़्यादा यहीं लोग चूकते हैं।

बोर्ड लिखता है कि 90 या उससे ज़्यादा दिनों की मज़दूरी पर्ची या नियुक्ति पत्र सिर्फ़ पंजीकरण के वक़्त नहीं, बल्कि पहले साल के बाद भी हर साल देना ज़रूरी है — सदस्यता ज़िंदा रखने के लिए भी और सहायता पाने के लिए भी।

यानी अंशदान भले तीन साल का एक बार में भरा हो, पर्ची हर साल श्रम कार्यालय में जमा करनी है।

इसका सीधा मतलब यह है: जहाँ भी काम करें, मज़दूरी की पर्ची लेते रहिए और उसका फ़ोटो फ़ोन में रखिए। साल के आख़िर में वही आपका सबसे ज़रूरी कागज़ है।

बोर्ड के पोर्टल पर "Upload Continuity Certificate" नाम का अलग पन्ना इसी काम के लिए बना है।

हिमाचल बोर्ड की योजनाएँ और रकम

ये रकमें बोर्ड के अपने पन्ने से ली गई हैं, अगस्त 2026 में, और कई के साथ नियम संख्या भी वहीं लिखी है। दावा करने से पहले श्रम कल्याण अधिकारी के दफ़्तर में पुष्टि कर लीजिए।

मृत्यु सहायता: काम के दौरान दुर्घटना से मौत पर ₹4,00,000, और प्राकृतिक मौत पर ₹2,00,000। अंतिम संस्कार के लिए ₹20,000।

पेंशन: 60 साल की उम्र पूरी होने पर कम से कम ₹1,000 प्रति माह।

विकलांगता पेंशन (नियम 275): ₹500 प्रति माह। इसके अलावा 50 प्रतिशत से ज़्यादा विकलांगता पर ₹50,000 और 50 प्रतिशत से कम पर ₹25,000।

विधवा पेंशन (नियम 300): ₹1,500 प्रति माह।

शादी: अपनी और दो बच्चों की शादी के लिए ₹51,000 प्रत्येक।

मातृत्व और पितृत्व: महिला लाभार्थी को प्रसूति पर ₹25,000, पुरुष लाभार्थी को ₹1,000। दो बच्चों तक।

बेटी जन्म उपहार (नियम 298): दो बेटियों तक, हर बेटी के जन्म पर ₹51,000 की FDR, जो बेटी के 18 साल पूरे होने पर ही निकलेगी।

चिकित्सा: बाह्य इलाज के लिए हर साल ₹50,000 तक, भर्ती होने पर ₹1,00,000 तक, और गंभीर बीमारी के लिए ₹5,00,000 तक।

पढ़ाई (दो बच्चों तक, हर साल): कक्षा 1 से 8 तक ₹8,400, कक्षा 9 से 12 तक ₹12,000, स्नातक ₹36,000, स्नातकोत्तर ₹60,000, डिप्लोमा ₹48,000, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा ₹60,000, और मेडिकल-इंजीनियरिंग जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम या पीएचडी ₹1,20,000।

होनहार बच्चों के लिए अलग नक़द छात्रवृत्ति: दसवीं में 75 प्रतिशत या ऊपर पर ₹25,000, बारहवीं में ₹35,000, और किसी भी विषय में 60 प्रतिशत या ऊपर से स्नातक पास करने पर ₹50,000।

हॉस्टल में रहने पर (नियम 301) हर साल ₹15,000 से ₹20,000।

मानसिक रूप से मंद या अपंग बच्चों की देखभाल के लिए (नियम 299) हर साल ₹20,000।

आवास (नियम 302): मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मंज़ूर मकान बनाने पर बोर्ड की तरफ़ से ₹1,50,000।

कौशल विकास भत्ता: कोर्स की अवधि में ₹1,500 प्रति माह — कामगार, उसके पति या पत्नी और दो बच्चों तक के लिए।

हिमाचल प्रदेश में न्यूनतम मज़दूरी

हिमाचल के बारे में हमें एक बात साफ़ कहनी है। निर्माण मज़दूरों की न्यूनतम मज़दूरी की कोई चालू सरकारी अधिसूचना हमें अगस्त 2026 में किसी भी काम करने वाली सरकारी वेबसाइट पर नहीं मिली। इसलिए हम यहाँ कोई दर नहीं लिख रहे — ग़लत दर लिखने से बेहतर है यह बताना कि सही दर कहाँ से पूछनी है।

हमने कहाँ-कहाँ देखा और क्या मिला

labour.hp.gov.in खुलता है, पर वह मालिकों और प्रतिष्ठानों के लॉगिन का पोर्टल है। उस पर न्यूनतम मज़दूरी का कोई पन्ना नहीं है।

labourcommissioner.hp.gov.in, hplabour.nic.in और employment.hp.gov.in — ये तीनों पते खुलते ही नहीं।

निर्माण बोर्ड की अपनी वेबसाइट bocw.hp.gov.in पर अधिसूचनाओं का पन्ना ज़रूर है, पर उस पर अध्यक्ष के दौरे के कार्यक्रम और टेंडर लगे हैं — मज़दूरी की कोई दर नहीं।

इसलिए हमने कोई नंबर नहीं छापा। इंटरनेट पर "हिमाचल न्यूनतम मज़दूरी" के नाम से जो आँकड़े घूमते हैं, उनका स्रोत हम जाँच नहीं पाए, और बिना जाँचे नंबर छापना आपके ही ख़िलाफ़ जाता है।

तो अपनी सही दर कैसे पता करें

सबसे भरोसेमंद रास्ता अपने ज़िले के श्रम कल्याण अधिकारी का दफ़्तर है। लेबर कार्ड भी वहीं बनता है, इसलिए एक ही चक्कर में दोनों काम हो जाएँगे।

दूसरा रास्ता: निर्माण बोर्ड के मुख्यालय 01972-222411 पर फ़ोन कीजिए और पूछिए कि आज निर्माण कामगार के लिए अधिसूचित न्यूनतम दर क्या है और वह किस अधिसूचना से आती है।

पूछते वक़्त तीन चीज़ें लिखवा लीजिए: अपने दर्जे की दर, अधिसूचना की तारीख़, और वह किस तारीख़ से लागू है। इन तीनों के बिना कोई भी नंबर अधूरा है।

और यह याद रखिए कि न्यूनतम मज़दूरी कानूनी हक़ है। दर पता न होना आपकी ग़लती नहीं है, पर दर पता कर लेना आपके ही हाथ में है — और मोल-भाव में यही एक नंबर सबसे ज़्यादा काम आता है।

तब तक क्या करें

हाज़िरी का अपना हिसाब ख़ुद रखिए — तारीख़, घंटे और तय हुई दिहाड़ी। कोई भी दावा बाद में इसी पर टिकता है।

मज़दूरी की पर्ची हर बार लीजिए। हिमाचल में वह वैसे भी हर साल श्रम कार्यालय में जमा करनी होती है, इसलिए वह दोहरे काम की चीज़ है।

दिहाड़ी तय करते वक़्त लिखकर या मैसेज पर तय कीजिए, ज़बानी नहीं।

और जब सही अधिसूचित दर मालूम हो जाए, उस कागज़ का फ़ोटो फ़ोन में रख लीजिए। ठेकेदार से बात करते वक़्त कागज़ दिखाना ज़बानी दावे से हमेशा भारी पड़ता है।

आम सवाल

सोलन में लेबर कार्ड कैसे बनवाएँ?
सोलन हिमाचल प्रदेश में आता है, इसलिए निर्माण मज़दूर Himachal Pradesh Building and Other Construction Workers Welfare Board में BOCW अधिनियम के तहत रजिस्ट्रेशन कराते हैं। शर्तें और फ़ॉर्म बोर्ड की आधिकारिक साइट पर हैं।
हिमाचल में लेबर कार्ड कितने का बनता है?
पंजीकरण शुल्क सिर्फ़ ₹1, एक ही बार। उसके ऊपर ₹9 का अग्रिम अंशदान, जो तीन साल चलता है। अगले तीन साल के लिए नवीनीकरण ₹15। यानी पहले तीन साल का पूरा सरकारी ख़र्च दस रुपये। कोई इससे ज़्यादा माँगे तो वह सरकारी फ़ीस नहीं है।
ठेकेदार मज़दूरी पर्ची नहीं दे रहा — हिमाचल में क्या करूँ?
बोर्ड के अपने पन्ने पर लिखा है कि ऐसा प्रमाणपत्र न मिल पाने पर शहरी स्थानीय निकाय के कार्यकारी अधिकारी, नगर निगम क्षेत्र में सम्बन्धित पार्षद या वार्ड सभा के सदस्य, या ग्राम पंचायत के पंचायत सचिव का जारी किया प्रमाणपत्र भी माना जा सकता है।
अंशदान तीन साल का भर दिया, अब हर साल कुछ करना है क्या?
हाँ, और यही सबसे ज़्यादा भूला जाता है। बोर्ड कहता है कि 90 दिन की मज़दूरी पर्ची हर साल श्रम कार्यालय में जमा करनी होती है — सदस्यता चालू रखने के लिए भी और सहायता पाने के लिए भी। पोर्टल पर इसके लिए "Upload Continuity Certificate" वाला पन्ना बना है।
हिमाचल में काम पर मौत हो जाए तो घरवालों को कितना मिलता है?
बोर्ड के पन्ने के मुताबिक काम के दौरान दुर्घटना से मौत पर ₹4,00,000 और प्राकृतिक मौत पर ₹2,00,000, साथ में अंतिम संस्कार के ₹20,000। विधवा को ₹1,500 प्रति माह पेंशन का भी प्रावधान है (नियम 300)।
hpbocwb.nic.in पर जाऊँ?
वह पता खुलता ही नहीं, हालाँकि बोर्ड के अपने सम्पर्क वाले पन्ने पर आज भी वही लिखा है। चालू पता bocw.hp.gov.in है।
हिमाचल में मज़दूर की एक दिन की दिहाड़ी कितनी होनी चाहिए?
हम यह नंबर नहीं बता रहे, क्योंकि अगस्त 2026 में हमें हिमाचल की कोई चालू सरकारी अधिसूचना किसी काम करने वाली सरकारी वेबसाइट पर नहीं मिली। अपने ज़िले के श्रम कल्याण अधिकारी से या निर्माण बोर्ड के 01972-222411 पर पूछिए, और अधिसूचना की तारीख़ तथा लागू होने की तारीख़ भी साथ में लिखवा लीजिए।
इंटरनेट पर हिमाचल की दर लिखी मिल रही है, वह सही है क्या?
हो सकता है, पर हम उसकी पुष्टि नहीं कर पाए। श्रम विभागों की दरें साल में एक या दो बार बदलती हैं और इंटरनेट पर पुरानी दरें सालों तक बिना तारीख़ के घूमती रहती हैं। जो भी नंबर मिले, उसके साथ अधिसूचना की तारीख़ ढूँढ़िए। तारीख़ न मिले तो उस नंबर पर भरोसा मत कीजिए।
दर पता नहीं है तो मोल-भाव कैसे करूँ?
दो चीज़ें फिर भी आपके हाथ में हैं — अपने इलाक़े का चालू बाज़ार रेट, जो नाके पर या साथ काम करने वालों से पता चल जाता है, और अपना हुनर। और दिहाड़ी लिखकर या मैसेज पर तय कीजिए, ज़बानी नहीं।

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