निर्माण मज़दूरों के लिए ESI और PF
ESI और PF दो अलग-अलग सरकारी योजनाएँ हैं। ESI इलाज और चोट-बीमारी के दिनों के पैसे के लिए है। PF आपकी बचत और बुढ़ापे की पेंशन के लिए है। दोनों तभी लगते हैं जब आपको रखने वाला मालिक इनके दायरे में आता हो — इसलिए सबसे पहला काम यह पता करना है कि आप इनमें हैं या नहीं।
अपडेट:
पहले यह पक्का करें कि आप इनमें हैं या नहीं
निर्माण मज़दूरों के साथ सबसे बड़ी उलझन यही है। हर साइट का मज़दूर अपने आप ESI या PF में नहीं आ जाता। यह इस पर निर्भर करता है कि आपको रखने वाला प्रतिष्ठान इन कानूनों के दायरे में आता है या नहीं।
इसलिए मान मत लीजिए — पूछिए। ठेकेदार या कंपनी से दो चीज़ें पूछें: क्या आपका ESIC कोड नंबर है, और क्या मेरा IP नंबर बना है। PF के लिए पूछें कि मेरा UAN नंबर क्या है।
निर्माण साइट के मज़दूरों को ESI में लाने का मामला सालों से अदालत में रहा है और उसकी स्थिति बदलती रही है। इसीलिए इस पन्ने पर हम यह नहीं कह रहे कि हर साइट मज़दूर ESI में है।
अगर आपका मालिक इनके दायरे में नहीं आता, तब भी आप ख़ाली हाथ नहीं हैं। हर राज्य में निर्माण मज़दूरों के लिए एक अलग रास्ता है — उस राज्य के कल्याण मंडल का लेबर कार्ड। पेंशन, इलाज, शादी और दुर्घटना की मदद उसी से मिलती है। बहुत से दिहाड़ी मज़दूर आख़िर में उसी रास्ते पर होते हैं।
एक ज़रूरी बदलाव — कानून बदल गए हैं
21 नवंबर 2025 से भारत की चार नई श्रम संहिताएँ लागू हो गई हैं। इनमें सामाजिक सुरक्षा संहिता भी है, जिसने पुराने ESI कानून और कर्मचारी मुआवज़ा कानून की जगह ले ली है।
इसका मतलब यह नहीं कि ESIC बंद हो गया। ESIC चल रहा है, अस्पताल चल रहे हैं और फ़ायदे मिल रहे हैं। बदलाव के दौर में पुराने नियम और योजनाएँ चलती रहती हैं।
पर इसका मतलब यह ज़रूर है कि नियम और रकम अगले कुछ महीनों में बदल सकते हैं। इसलिए कोई भी बड़ा दावा करने से पहले अपनी ESI ब्रांच से या 1800-11-2526 पर पूछ लीजिए।
नई संहिता में एक बात मज़दूरों के हक़ में है — जिन कामों को ख़तरनाक घोषित किया गया है, वहाँ एक भी मज़दूर हो तो ESI लागू होगा। निर्माण के काम के लिए यह आगे चलकर बड़ी बात बन सकती है।
ESI किस पर लगता है और कितना कटता है
ESI में वही आते हैं जिनकी महीने की मज़दूरी ₹21,000 तक है। दिव्यांग व्यक्ति के लिए यह सीमा ₹25,000 है। यह सीमा 1 जनवरी 2017 से चली आ रही है।
सामान्य तौर पर 10 या ज़्यादा लोगों वाले प्रतिष्ठान इसके दायरे में आते हैं। नई श्रम संहिताओं के बाद ESIC का दायरा पूरे देश में बढ़ा दिया गया है — 10 से कम वालों के लिए यह मर्ज़ी से है, और ख़तरनाक काम में एक भी मज़दूर हो तो ज़रूरी है।
आपकी मज़दूरी में से 0.75% कटता है और मालिक अपनी तरफ़ से 3.25% देता है। यानी कुल 4%, जिसमें बड़ा हिस्सा मालिक का है। ये दरें 1 जुलाई 2019 से चल रही हैं।
सबसे काम की बात: अगर आपकी औसत दिहाड़ी ₹176 प्रति दिन तक है तो आपकी तरफ़ से कुछ नहीं कटता। मालिक फिर भी अपना 3.25% भरता है और आपको पूरा फ़ायदा मिलता रहता है।
मालिक को यह पैसा हर महीने की आख़िरी तारीख़ के 15 दिन के अंदर जमा करना होता है।
ESI से क्या-क्या मिलता है
इलाज: आपका और परिवार का पूरा इलाज, नौकरी के पहले दिन से। ख़र्च की कोई ऊपरी सीमा नहीं है।
काम में चोट लगने पर: मज़दूरी का 90%, जब तक चोट ठीक न हो। यह पहले ही दिन से मिलता है और इसके लिए पहले से कोई पैसा जमा होना ज़रूरी नहीं। निर्माण मज़दूर के लिए यह सबसे बड़ी बात है।
बीमारी पर: मज़दूरी का 70%, साल में ज़्यादा से ज़्यादा 91 दिन। इसके लिए छह महीने की अवधि में 78 दिन का अंशदान चाहिए। कुछ लंबी और गंभीर बीमारियों में यह दो साल तक और 80% की दर पर मिलता है।
प्रसूति: महिला मज़दूर को 26 हफ़्ते तक पूरी मज़दूरी, और डॉक्टर की सलाह पर एक महीना और।
हमेशा की अपंगता पर: मज़दूरी का 90% महीने-महीने, जितनी कमाने की ताक़त गई हो उस हिसाब से, जो मेडिकल बोर्ड तय करता है। पूरी अपंगता में यह ज़िंदगी भर चलता है।
काम में मौत होने पर: परिवार को मज़दूरी का 90% महीने-महीने। अंतिम संस्कार के लिए ₹15,000 अलग से, पहले ही दिन से।
साइट पर चोट लग जाए तो
सबसे पहले अपने ठेकेदार, फ़ोरमैन या सुपरवाइज़र को बताएँ। नियम कहता है कि मज़दूर को हादसे की ख़बर जितनी जल्दी हो सके देनी है — लिखकर या मुँह से। घायल ख़ुद न बता सके तो कोई और उसकी तरफ़ से बता सकता है।
इसके बाद मालिक की ज़िम्मेदारी है कि वह फ़ॉर्म 12 में हादसे की रिपोर्ट ESI ब्रांच ऑफ़िस और बीमा मेडिकल अधिकारी को भेजे। चोट गंभीर हो तो तुरंत, बाकी हालत में 48 घंटे के अंदर।
बहुत जगह लिखा मिलता है कि 24 घंटे की सीमा है। ESI के नियम में 48 घंटे लिखा है, और गंभीर चोट पर तुरंत। यह फ़र्क याद रखिए।
मालिक की यह भी ज़िम्मेदारी है कि वह फ़र्स्ट-एड, इलाज और अस्पताल तक ले जाने का इंतज़ाम करे।
सबूत रखिए — चोट का फ़ोटो, अस्पताल का पर्चा, और किसे कब बताया इसका मैसेज। दावे के वक़्त यही काम आता है।
अपना ESI अस्पताल और डिस्पेंसरी कैसे ढूँढें
ESIC की वेबसाइट पर डिस्पेंसरी ढूँढने का पन्ना है। वहाँ राज्य में Karnataka और रीजनल ऑफ़िस में Bengaluru चुनिए — पता, फ़ोन नंबर और ईमेल मिल जाएगा।
IP नंबर और पहचान कार्ड की जानकारी के लिए ESIC की Insured Person लॉगिन वाली सुविधा है।
ESIC की मुफ़्त हेल्पलाइन 1800-11-2526 है, और इलाज से जुड़ी बात के लिए 1800-11-3839।
काम शुरू करते ही एक बार अपनी सबसे पास वाली डिस्पेंसरी का पता देख लीजिए। चोट लगने के बाद ढूँढना मुश्किल पड़ता है।
PF क्या है और कितना कटता है
PF यानी Provident Fund — आपकी जबरन बचत। हर महीने आपकी मज़दूरी से कटता है, उतना ही मालिक डालता है, और उस पर ब्याज मिलता है।
आपकी तरफ़ से 12% कटता है और वह पूरा PF में जाता है। कुछ हालत में यह 10% होता है — जैसे जहाँ 20 से कम लोग हों, या ईंट-भट्ठे जैसी कुछ तय फ़ैक्ट्रियों में।
मालिक की तरफ़ से भी उतना ही जाता है, पर वह दो हिस्सों में बँटता है: 8.33% पेंशन (EPS) में और बाकी 3.67% PF में।
यह गिनती ₹15,000 महीने की तय सीमा पर होती है। PF तब लगता है जब प्रतिष्ठान में 20 या ज़्यादा लोग हों। इससे कम लोग हों तब भी मालिक और ज़्यादातर मज़दूर मिलकर अपनी मर्ज़ी से इसमें आ सकते हैं।
ठेकेदार के नीचे काम करते हैं तो भी PF बनता है
यह सबसे ज़रूरी बात है और सबसे कम लोगों को पता है। PF कानून में मज़दूर की परिभाषा में वह आदमी भी शामिल है जो ठेकेदार के ज़रिए काम पर लगा हो।
और ज़िम्मेदारी सिर्फ़ ठेकेदार की नहीं है। कानून की धारा 8A मुख्य मालिक पर यह ड्यूटी डालती है कि वह देखे कि ठेकेदार अपनी ज़िम्मेदारी पूरी कर रहा है। योजना का नियम यह भी कहता है कि मालिक को पहले ख़ुद PF जमा करना है — सीधे रखे गए मज़दूरों का भी और ठेकेदार के ज़रिए रखे गए मज़दूरों का भी।
यानी अगर ठेकेदार आपका PF नहीं जमा कर रहा, तो जिस बिल्डर या कंपनी की साइट पर आप काम कर रहे हैं, वह भी जवाबदेह है। EPFO का नियम यह भी कहता है कि मुख्य मालिक ठेकेदार का बिल पास करने से पहले यह जाँचे कि उसने अपने मज़दूरों का PF भरा है या नहीं।
अपना PF का पैसा कैसे देखें
सबसे आसान तरीका: अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल दीजिए। दो घंटी के बाद कॉल अपने आप कट जाती है और कोई पैसा नहीं लगता। इसके लिए UAN चालू होना चाहिए और आधार, बैंक खाता या PAN में से कोई एक जुड़ा होना चाहिए।
SMS से: 7738299899 पर मैसेज भेजकर भी बैलेंस मिल जाता है, और यह दस भाषाओं में आता है।
ऑनलाइन: EPFO का सदस्य पोर्टल और पासबुक वाला पन्ना खोलकर हर महीने का जमा देखा जा सकता है। EPFO की हेल्पलाइन 14470 है।
महीने में एक बार पासबुक देख लेने की आदत डालिए। यही एक तरीका है जिससे पता चलता है कि पैसा कट तो रहा है पर जमा नहीं हो रहा।
PF और पेंशन का पैसा कैसे निकालें
दावा EPFO के सदस्य पोर्टल से ऑनलाइन होता है। अगर आपका UAN चालू है और बैंक खाता व आधार उससे जुड़े हैं, तो आधार वाले कंपोजिट क्लेम फ़ॉर्म पर सिर्फ़ आपके दस्तख़त चाहिए — मालिक के दस्तख़त की ज़रूरत नहीं।
यह उन मज़दूरों के लिए बहुत बड़ी राहत है जिनका ठेकेदार काम ख़त्म होने के बाद फ़ोन नहीं उठाता।
नौकरी छोड़ने पर PF निकालने के लिए दो महीने रुकना पड़ता है। रिटायरमेंट पर यह इंतज़ार नहीं है।
पेंशन (EPS) के लिए 10 साल की पेंशन-योग्य सेवा चाहिए। पूरी पेंशन 58 साल की उम्र पर मिलती है। 50 से 57 की उम्र के बीच नौकरी छोड़ें तो कम रकम वाली जल्दी पेंशन ली जा सकती है।
मज़दूर की मौत होने पर परिवार की पेंशन के लिए 10 साल की शर्त नहीं लगती। पत्नी या पति को पेंशन और बच्चों को 25 साल की उम्र तक (एक साथ दो बच्चों को) मिलती है।
पैसा कट रहा है पर जमा नहीं हो रहा — तब क्या
पहले पासबुक देखकर पक्का कीजिए। UAN चालू हो तो हर महीने का जमा या न-जमा साफ़ दिखता है।
यह मामूली बात नहीं है। जिस अवधि का पैसा मालिक ने जमा नहीं किया, उस अवधि का पेंशन वाला फ़ायदा मज़दूर को नहीं मिलता। यानी सज़ा आपको भुगतनी पड़ती है। इसीलिए हर महीने पासबुक देखना ज़रूरी है।
शिकायत EPFO के अपने पोर्टल EPFiGMS पर दर्ज होती है। शिकायत कहीं से भी दर्ज करें, वह अपने आप सही दफ़्तर में पहुँच जाती है।
ESI से जुड़ी शिकायत CPGRAMS पर जाती है — वहाँ विभाग में ESIC और फिर अपना रीजनल ऑफ़िस चुनना होता है।
सावधानी: EPFO या ESIC कभी आपका UAN, पासवर्ड, आधार, बैंक की जानकारी या OTP फ़ोन पर नहीं माँगते। कोई माँगे तो वह ठग है।
ये काम जुड़े हैं
- राजमिस्त्री दिहाड़ी नौकरियाँ किराए पर लें
- हेल्पर दिहाड़ी नौकरियाँ किराए पर लें
आम सवाल
- क्या हर निर्माण मज़दूर का ESI बनता है?
- नहीं, अपने आप नहीं। यह इस पर निर्भर करता है कि आपको रखने वाला प्रतिष्ठान ESI के दायरे में आता है या नहीं, और साइट मज़दूरों को इसमें लाने का मामला अदालत में रहा है। मालिक से ESIC कोड और अपना IP नंबर पूछकर ही पक्का करें।
- मेरी दिहाड़ी कम है, क्या फिर भी ESI का पैसा कटेगा?
- अगर आपकी औसत दिहाड़ी ₹176 प्रति दिन तक है तो आपकी तरफ़ से कुछ नहीं कटता। मालिक अपना 3.25% फिर भी भरता है और आपको पूरा फ़ायदा मिलता है।
- काम पर चोट लगी और अभी नया-नया लगा हूँ — क्या मुझे कुछ मिलेगा?
- अगर आप ESI में हैं तो हाँ। काम में लगी चोट पर मज़दूरी का 90% नौकरी के पहले दिन से मिलता है, चाहे अभी तक एक रुपया भी अंशदान न कटा हो।
- ठेकेदार के नीचे काम करता हूँ, क्या मेरा PF बनेगा?
- हाँ, ठेकेदार के ज़रिए रखे गए मज़दूर भी PF कानून में आते हैं। और मुख्य मालिक की भी ज़िम्मेदारी है कि ठेकेदार पैसा जमा कर रहा है या नहीं, यह वह जाँचे।
- PF निकालने के लिए ठेकेदार के दस्तख़त चाहिए?
- नहीं। अगर UAN चालू है और आधार व बैंक खाता उससे जुड़े हैं, तो आधार वाले कंपोजिट क्लेम पर सिर्फ़ आपके दस्तख़त से काम हो जाता है।
- बिना इंटरनेट के PF बैलेंस कैसे देखूँ?
- अपने रजिस्टर्ड मोबाइल से 9966044425 पर मिस्ड कॉल दीजिए। दो घंटी में कट जाएगी और जानकारी मैसेज से आ जाएगी। कोई पैसा नहीं लगता।
शहर और राज्य के अनुसार
लेबर कार्ड, कल्याण बोर्ड और न्यूनतम मज़दूरी हर राज्य अलग तय करता है। अपने शहर पर जाएँ।
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स्रोत
- ESIC — कवरेज और मज़दूरी सीमा ₹21,000
- ESIC — अंशदान दर 0.75% / 3.25% और ₹176 की छूट
- ESIC — कौन सा फ़ायदा कितना मिलता है
- ESIC — डिस्पेंसरी और अस्पताल ढूँढें
- ESI (General) Regulations 1950 — फ़ॉर्म 12 और 48 घंटे
- EPFO — अंशदान दर और ₹15,000 की सीमा
- EPFO — सदस्य पोर्टल
- EPFO — पासबुक
- EPFO — मिस्ड कॉल सेवा 9966044425
- EPFO — सवाल-जवाब (ठेका मज़दूर, पेंशन, दावा)
- EPFiGMS — PF की शिकायत
- श्रम संहिताएँ 21 नवंबर 2025 से लागू